आरा, 1 अप्रैल. पूर्व मध्य रेल में दानापुर मंडल के अंतर्गत आरा जंक्शन से बीते साल नवंबर से स्पेशल के तौर पर चलाई जा रही 03319/20 आरा राजेंद्र नगर कामाख्या/सिलीगुड़ी कैपिटल एक्सप्रेस व 03347/48 आरा पटना कोलकाता त्रि-साप्ताहिक गरीब रथ स्पेशल और 03303/04 आरा दानापुर जयनगर स्पेशल को अबतक स्थाई परिचालन नहीं होने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बता दें साउथ बिहार के लेट लतीफी को देखते हुए यात्री संगठनों के द्वारा दानापुर मंडल के आला अधिकारियों से कैपिटल एक्सप्रेस सहित कोलकाता गरीब रथ के आरा तक विस्तार की मांग को रखा था जिसके बाद इन रेगुलर ट्रेनों को स्पेशल का दर्जा देकर आरा जंक्शन तक अस्थाई विस्तार तो दे दिया गया लेकिन स्पेशल गाड़ी होने की वजह से आरा जंक्शन से कोलकाता/जयनगर या सिलीगुड़ी कामख्या के लिए आरक्षित श्रेणियों में टिकटों की बुकिंग नहीं होने से यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. इन स्पेशल ट्रेनों के आरक्षित श्रेणियों में यात्रा करने के लिए रेगुलर ट्रेनों के मुकाबले अधिक किराया तो देना पड़ता ही है, इसके अलावा आरा जंक्शन से कामाख्या/सिलीगुड़ी/कोलकाता/जयनगर आदि स्टेशनों तक यात्रा करने के लिए यात्रियों को दो बार रिजर्वेशन भी करवाना पड़ता है. रेल यात्रियों का कहना है कि आरा जंक्शन पर यात्रियों का दबाव पहले से काफी बढ़ा है जिससे आरा के राजस्व में भारी वृद्धि हुई है, इसके बावजूद यहां से ट्रेनों को खोलने के लिए स्पेशल का सहारा लिया जा रहा है जबकि स्थाई परिचालन के लिए रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए. फिलहाल इन सभी स्पेशल ट्रेनों का परिचालन 31 मार्च तक किया जाने की अधिसूचना जारी की गई है लेकिन ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि एक बार फिर इनके फेरे में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है.

कैपिटल एक्सप्रेस के विस्तार से साउथ बिहार की लेट लतीफी में आई कमी
आरा से दुर्ग के बीच चलने वाली 13287/88 साउथ बिहार एक्सप्रेस पिछले कई महीनों से आरा जंक्शन पर अपने समय से प्रतिदिन 4-6 घंटे लेट पहुंचने के बाद भी अपने समय पर खुल रही है जिसका मुख्य कारण स्पेशल के तौर पर चलाई जा रही 03319/20 कैपिटल एक्सप्रेस और 13287/88 साउथ बिहार के रैंक संरचना एक सामान्य होने की वजह से मेंटेनेंस के बाद आपस में रैक शेयरिंग कर चलाई जाती है. यदि कैपिटल एक्सप्रेस का आरा तक स्थाई विस्तार नहीं हुआ तो यात्रियों को साउथ बिहार की लेट लतीफी का सामना तो करना पड़ेगा ही, वहीं आरा से कामाख्या/सिलीगुड़ी जाने की सीधी-सुविधा भी छिन सकती है.
गरीब रथ के आरा विस्तार के बावजूद कोलकाता/हावड़ा जाने के लिए टिकट बुकिंग की समस्या बरकरार
आरा से हावड़ा जाने के लिए सीधी ट्रेन की मांग लंबे समय से रही है जिसके बाद दानापुर मंडल के द्वारा 12359/60 कोलकाता गरीब को स्पेशल के तौर पर आरा तक विस्तार दिया गया लेकिन आरा तक स्थाई विस्तार ना होने से आरक्षित श्रेणियों में टिकटों की बुकिंग आज भी पटना जंक्शन से ही करनी पड़ती है जिससे आरा जंक्शन के राजस्व में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
बता दें कि आरा से प्रतिदिन 3/4 जोड़ी लंबी दूरी की गाड़ियां हावड़ा के लिए गुजरती हैं जिनमें सीटों का कोटा सीमित होने की वजह से टिकट मिलना मुश्किल होता है. अगर कोलकाता गरीब रथ का स्थाई विस्तार आरा तक होता है तो यात्रियों को काफी राहत मिलेगी.
यात्री संगठनों ने आरा जंक्शन के नामकरण के विरोध में जताई नाराजगी

आरा सांसद सुदामा प्रसाद के द्वारा बीते दिनों लोकसभा में आरा जंक्शन का नाम बदलकर कामरेड राम नरेश राम के नाम पर करने का प्रस्ताव सांसद में उठाया था, जिसके बाद जिले के यात्री संगठनों ने इसका विरोध दर्ज कराया है. आरा जंक्शन रेलफैन क्लब के सदस्य राजेश कुमार व अमित ने बताया कि आरा जंक्शन का एक अपना सुनहरा इतिहास रहा है. आरा जंक्शन अपनी पहचान के लिए किसी भी व्यक्तिगत नामों का मोहताज नहीं है. आरा जंक्शन का नाम बदलने से न केवल स्थानीय लोगों को परेशानी होगी, बल्कि यह शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी कम करेगा.सांसद सुदामा प्रसाद को चाहिए कि आरा जंक्शन की लंबित विकास योजनाओं को पूरा करने और आरा में नई ट्रेनों के ठहराव व गाड़ियों के विस्तार की दिशा में अपनी सकारात्मक ऊर्जा लगाए जाने की आवश्यकता है.
ओ पी पांडेय